હાથ હિંચોળીને તાણતા દોરી | ગોહિલ નું હાલરડું | દુલાભાયા કાગ | JMN0009_RAVAN | UNKNOWN_TELLS | HALRDU GOHIL NU |
हालरडुं हाथ हींचोळीने ताणतां दोरी, हैडे हेत न माय – माता गाय बाळनां गाणां…… (तोय)वीरोजी रेय नई छाना ……टेक पारणामांथी सुणवी छे एने, वंश गोहिलोनी वात – आंखोथी बाळ समजावे …… (मने) ते केडे नींदरुं आवे ……१ सांभळे सूतो बाळराजा, माए मीठडी मांडी वात – गोहिलोनुं बिरद छे न्यारुं …… गंगाजळ कुळ छे तारुं ……२ ब्राह्मण वैश्य ने शूद्न माटे रूडी, गंगमाताजी धार- रजपूतोनुं तीर्थ बतावुं …… (एने) प्रजाना हितमां न्हावुं……३ बोल अफर, जेना काछ अणडग, जेने देशतणां अभिमान- पोतानी भोमका माटे …… ऊनां ऊनां लोई पण छाटे ……४ सिंह सादूळा ! तुं राखीश मा झाझी परदेशोनी प्रीत- घरोघर घोडलां हांकी …… प्रजानी सुण हालाकी ……५ आत्पजनो ने भायातने, बाळुडा ! जाणजे पोतानी बांय- एनी जागीर न लेजे …… एने दु:खे भागीओ थाजे ……६ सुख दु:खे समभाव हृदे, एवा रजपूतोनां नाम एटलुं, मारा प्राणथी व्हाला…… लखी राख, कृष्णना लाला ……७ आंहींनुं सुधारी, बाळ मारा ! उर धरजे इश्र्वर ध्यान- सांभळ, पेरमना राज. देयुंना मोह नो’य झाझा……८ आशरे आव्यो न आपीओ, रे एक ससलानो शिकार – क्षत्रीवट धर्मने धार्यो…… (ते दी) खांडान...